चेरामन जुमा मस्जिद; Cheraman Juma Masjid केरल कोडंगलूर तालुक के मेथला गांव में स्थित है .[1][2][3] चेरामन जुमा मस्जिद भारत की प्रथम जुमा मस्जिद है।.[4][5][6] दंतकथाओं के अनुसार चेरामन पेरुमल एक बार अरब की तीर्थ यात्रा पर गए जहां जेद्दा में उनकी मुलाकात धर्म प्रचारक से हुई। उसके बाद चेरामन ने इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया और अपना नाम तजुद्दीन रख लिया। उनकी शादी जेद्दा के तत्कालीन राजा की बहन से हुई और वे यहां बस गए। अपनी मृत्यु से पुर्व उन्होंने जेद्दा के राजा को केरल के शासकों के नाम कुछ पत्र दिए जिसमें केरल में इस्लाम के प्रचार में सहायता करने का अनुरोध किया गया था।जेद्दा के राजा केरल आए और कोडुंगलूर के राजा से मिले और उन्होंने कोडुंगलूर के राजा को एक मस्जिद बनाने में सहायता की।
वस्तूकलासंपादित करें
इस मस्जिद का आकार और निर्माण हिंदुओं ने हिंदू कला और वास्तुशिल्प के आधार पर किया था। मस्जिद के साथ तीन महान इस्लाम धर्म अनुयायियों की कब्रें हैं तथा भारत की पहली और विश्व की दूसरी ऐसी जगह है जहां जुमा नमाज शुरु हुई थी।
अरबो का आगमनसंपादित करें
चेरामन जुमा मस्जिद का निर्माण पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जीबनकाल में हुआ था और अरब के बहार बनने वाली विश्व की प्रथम मस्जिद थी। जब अरब के मुसलमानों का व्यापार की दृष्टि से भारत के दक्षिणी तट पर आगमन हुआ तो उस समय मुस्लिम धर्म प्रचारक दबान दीमार सहाब ने केरल के तटीय इलाको में कई मस्जिदो के निर्माण कराया।
- चेरामन जुमा मस्जिद की स्वर्ण अलंकृत प्रतिकृति उपहार स्वरुम में भेँट किया।
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